कर्तव्य पथ बोलेगा, दुनिया देखेगी: आज भारत का संविधान परेड में उतरेगा!

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

आज भारत सिर्फ तिरंगा नहीं लहरा रहा, बल्कि अपने संविधान, संस्कृति और सामूहिक आत्मविश्वास को दुनिया के सामने पेश कर रहा है।

77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली का कर्तव्य पथ एक बार फिर इतिहास का गवाह बनेगा, जहां शक्ति के साथ-साथ संवेदनशीलता भी कदमताल करती दिखेगी।

राष्ट्रपति की अध्यक्षता, वैश्विक मौजूदगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गणतंत्र दिवस समारोह और परेड की अध्यक्षता करेंगी। इस बार कार्यक्रम को खास बना रही है यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी, जो चीफ गेस्ट के तौर पर राष्ट्रपति के साथ समारोह स्थल पहुंचेंगी।

यह संकेत है कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि Global Democratic Partner है।

टाइम टेबल: कब क्या होगा

  • सुबह 9:30 बजे – गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत
  • सुबह 10:30 बजे – परेड का औपचारिक आरंभ

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और फिर कैबिनेट के साथ कर्तव्य पथ आएंगे।

बग्गी, बैंड और 21 तोपों की सलामी

राष्ट्रपति मुर्मू और दोनों मुख्य अतिथि राष्ट्रपति अंगरक्षकों की सुरक्षा में पारंपरिक बग्गी से कर्तव्य पथ पहुंचेंगी। राष्ट्रध्वज फहराने के बाद राष्ट्रगान होगा और 172 फील्ड रेजिमेंट की 1721 सेरेमोनियल बैटरी द्वारा 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।

यह वो पल होता है, जब पूरा देश टीवी के सामने सीधा खड़ा हो जाता है।

परेड की कमान और वीरता सम्मान

परेड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार संभालेंगे, जबकि मेजर जनरल नवराज ढिल्लों दूसरे कमांडिंग ऑफिसर होंगे। इसके बाद परमवीर और अशोक चक्र विजेताओं के नामों की घोषणा की जाएगी — जहां वीरता सिर्फ शब्द नहीं, इतिहास बन जाती है।

30 झांकियां, एक भारत की कहानी

इस साल परेड में कुल 30 झांकियां प्रदर्शित होंगी—

  • 17 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश
  • 13 मंत्रालय और विभाग

थीम:

  • स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम
  • समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत

साथ ही, वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मनाया जा रहा है।

नदियों और सुरों में सजा गणतंत्र

दर्शक दीर्घाओं को इस बार गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के नाम दिए गए हैं। बीटिंग रिट्रीट के लिए दीर्घाएं सितार, तबला, शहनाई और वीणा जैसे भारतीय वाद्ययंत्रों के नाम पर होंगी।

परेड देखें, पर सोच बंद न करें

हर साल परेड बदलती है, पर असली परीक्षा ये है— क्या संविधान सिर्फ मंच तक सीमित है या ज़मीन पर भी ज़िंदा है? गणतंत्र दिवस याद दिलाता है कि देशभक्ति नारे नहीं, नागरिक जिम्मेदारी मांगती है।

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